Thursday, June 18, 2015

ग़ज़ल - पवन अमर

ग़ज़ल 

वादा तो कर गये वो,
लेकिन मुकर गये वो ।

कुछ आदमी थे यहाँ,
अब जाने किधर गये वो ।

रात भर ठहर के तारे,
अल सुबह घर गये वो ।

इक बार देखा था,
दिल में उतर गये वो ।

फूल चुनने बैठे थे,
काँटों से भर गये वो ।

निकले जो घर से बाहर,
कुछ और निखर गये वो ।

चंद मोती संभाल रखे थे,
अश्कों में बिखर गये वो ।

- पवन अमर

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