ग़ज़ल
वादा तो कर गये वो,लेकिन मुकर गये वो ।
कुछ आदमी थे यहाँ,
अब जाने किधर गये वो ।
रात भर ठहर के तारे,
अल सुबह घर गये वो ।
इक बार देखा था,
दिल में उतर गये वो ।
फूल चुनने बैठे थे,
काँटों से भर गये वो ।
निकले जो घर से बाहर,
कुछ और निखर गये वो ।
चंद मोती संभाल रखे थे,
अश्कों में बिखर गये वो ।
- पवन अमर
Wah sundar
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