Monday, June 15, 2015

दोहे - लक्ष्मण प्रसाद लड़ीवाला

करते शब्द प्रहार 

प्रेम पूर्ण व्यवहार से, बढ़ता प्यार अपार|
मधुर वचन से आदमी, जीत सके संसार ||

शब्दों के क्या अर्थ हैं, पहले करें  विचार|
संबंधों की डोर पर, करते शब्द प्रहार ||

नैतिकता बेजार है, भारी अब बाजार|
लेन-देन हावी हुआ, कमतर है व्यवहार ||

घोर प्रदूषण खा रहा, उगते सुंदर फूल|
मानवता की राह में, बिछते देखे शूल ||

जीवों का आदर करें, प्रेम पूर्ण व्यवहार|
याद रहेंगे कृत्य ही, छोड़ें जब संसार ||

कड़वी हो सच्चाइयाँ, पर अच्छा बर्ताव|
गाँठ कभी बाँधे नहीं, मन में रख दुर्भाव ||

नेता जब करने लगें, सबसे सद्व्यहार|
राम राज्य की कल्पना,तब होगी साकार ||

गुरु चेले के बीच में, बना रहे सद्भाव|
सदाचार की सीख से, आता आदर भाव ||

संतोषी मन भाव से, करे ह्रदय को तृप्त|
इच्छाएं बढती रहें, रहता मन संतप्त ||

                      -लक्ष्मण रामानुज लडीवाला, जयपुर 

3 comments:

  1. दोहे अनुमोदित करने के लिए हार्दिक आभार श्री रघुविन्द्र यादव जी

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  2. दोहे अनुमोदित करने के लिए हार्दिक आभार श्री रघुविन्द्र यादव जी

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  3. स्वागत है आदरणीय

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