नवनिर्मित नेकलस अपने सुंदर रंग-रूप पर खूब रीझा और उसके पास थकी-हारी पड़ी हथौड़ी को चिढाते हुए बड़ी तिक्तता से कहने लगा-"तुम बहुत भद्दी हो| मेरे से दूर हट जाओ|"
"लेकिन तुम यह क्यों भूलते हो] तुम्हारा यह सुंदर बदन मेरी ही चोटों की परिणति है?" हथौड़ी ने बड़ी अहमियत से नेकलस की बात का प्रतिवाद किया|
-रत्नकुमार सांभरिया, जयपुर
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