किससे बिछड़ी कौन मिला था भूल गई,
कौन बुरा था कौन था अच्छा भूल गई|
कितनी बातें झूठी थीं और कितनी सच,
जितने भी लफ़्ज़ों को परखा भूल गई|
चारों ओर थे धुंधले-धुंधले चेहरे से,
ख्वाब की सूरत जो भी देखा भूल गई|
सुनती रही मैं सबके दुःख ख़ामोशी से,
किसका दुख था मेरे जैसा भूल गई|
भूल गई हूँ किस से मेरा नाता था,
और ये नाता कैसे टूटा भूल गई||
कौन बुरा था कौन था अच्छा भूल गई|
कितनी बातें झूठी थीं और कितनी सच,
जितने भी लफ़्ज़ों को परखा भूल गई|
चारों ओर थे धुंधले-धुंधले चेहरे से,
ख्वाब की सूरत जो भी देखा भूल गई|
सुनती रही मैं सबके दुःख ख़ामोशी से,
किसका दुख था मेरे जैसा भूल गई|
भूल गई हूँ किस से मेरा नाता था,
और ये नाता कैसे टूटा भूल गई||
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