Saturday, May 23, 2015

फ़ातिमा हसन की ग़ज़ल

किससे बिछड़ी कौन मिला था भूल गई,
कौन बुरा था कौन था अच्छा भूल गई|

कितनी बातें झूठी थीं और कितनी सच,
जितने भी लफ़्ज़ों को परखा भूल गई|

चारों ओर थे धुंधले-धुंधले चेहरे से,
ख्वाब की सूरत जो भी देखा भूल गई|

सुनती रही मैं सबके दुःख ख़ामोशी से,
किसका दुख था मेरे जैसा भूल गई|

भूल गई हूँ किस से मेरा नाता था,
और ये नाता कैसे टूटा भूल गई||

0 comments:

Post a Comment