मु$फ्त में कुछ भी दे व्यापारी, बहुत कठिन है
घोड़ा करे घास से यारी, बहुत कठिन है
सज़दा करने वालों की बस्ती में, प्यारे !
ढूँढ़ रहे हो तुम $खुद्दारी, बहुत कठिन है
चपरासी तो समझ गया है, मेरी समस्या
समझ सकेगा क्या अधिकारी, बहुत कठिन है
रिश्वत लेकर फँसा जो यारो! दे कर छूटा
रुक पाएगी ये बीमारी, बहुत कठिन है
सय्यादों के गठबन्धन ने जाल बिछाया
पंछी समझ सकें मक्कारी, बहुत कठिन है
एक व्यथा जो हो मन की तो कह दूँ तुमसे
समझाना पीड़ाएँ सारी, बहुत कठिन है
जीना भी आसान नहीं दुनिया में लेकिन
मरने की करना तैयारी, बहुत कठिन है
नंगे पाँव चले हो 'साहिलÓ सँभल के चलना
राह उसूलों की ये तुम्हारी बहुत कठिन है ।
घोड़ा करे घास से यारी, बहुत कठिन है
सज़दा करने वालों की बस्ती में, प्यारे !
ढूँढ़ रहे हो तुम $खुद्दारी, बहुत कठिन है
चपरासी तो समझ गया है, मेरी समस्या
समझ सकेगा क्या अधिकारी, बहुत कठिन है
रिश्वत लेकर फँसा जो यारो! दे कर छूटा
रुक पाएगी ये बीमारी, बहुत कठिन है
सय्यादों के गठबन्धन ने जाल बिछाया
पंछी समझ सकें मक्कारी, बहुत कठिन है
एक व्यथा जो हो मन की तो कह दूँ तुमसे
समझाना पीड़ाएँ सारी, बहुत कठिन है
जीना भी आसान नहीं दुनिया में लेकिन
मरने की करना तैयारी, बहुत कठिन है
नंगे पाँव चले हो 'साहिलÓ सँभल के चलना
राह उसूलों की ये तुम्हारी बहुत कठिन है ।
-नगरपालिका के सामने, महेन्द्रगढ
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