फर्क है तुझ में, मुझ में बस इतना,
तू ने अपने उसूल की खातिर,
सैंकड़ों दोस्त कर दिए कुर्बां,
और मैं! एक दोस्त की खातिर,
सौ उसूलों को तोड़ देता हूँ।
तू ने अपने उसूल की खातिर,
सैंकड़ों दोस्त कर दिए कुर्बां,
और मैं! एक दोस्त की खातिर,
सौ उसूलों को तोड़ देता हूँ।
-1085, सराय मोहल्ला, पठानकोट
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