शहर से जब गाँव वो आ जाएगा
देखना फिर आदमी हो जाएगा
जब अंधेरे में करेगी माँ दुआ
हर तरफ इक नूर-सा छा जाएगा
कल किया है पत्थरों ने फैसला
बोलना अब लाज़मी हो जाएगा
रातभर माँ को रही उम्मीद ये
भूखा बच्चा नींद में सो जाएगा
चाँद को धरती पे मत लाना कभी
वह हमारी भीड़ में खो जाएगा
उससे मेरा जि़क्र मत करना '$गैरÓ
वह पुरानी याद में खो जाएगा
-10-स्वप्रलोक कॉलोनी
कमता, चिनहट, लखनऊ
देखना फिर आदमी हो जाएगा
जब अंधेरे में करेगी माँ दुआ
हर तरफ इक नूर-सा छा जाएगा
कल किया है पत्थरों ने फैसला
बोलना अब लाज़मी हो जाएगा
रातभर माँ को रही उम्मीद ये
भूखा बच्चा नींद में सो जाएगा
चाँद को धरती पे मत लाना कभी
वह हमारी भीड़ में खो जाएगा
उससे मेरा जि़क्र मत करना '$गैरÓ
वह पुरानी याद में खो जाएगा
-10-स्वप्रलोक कॉलोनी
कमता, चिनहट, लखनऊ
सुंदर ग़ज़ल ..!!
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