Friday, April 24, 2015

विज्ञानं व्रत की ग़ज़ल

तुमने जो पथराव जिए
हमने उनके घाव जिए
बचपन का दोहराव जिए
हम का$गज़ की नाव जिए
वो हमसे अलगाव जिए
यानी एक अलाव जिए
सुलझाने को एक तनाव
हमने कई तनाव जिए
जिसको मंजि़ल पाना है
वो क्या $खाक पड़ाव जिए
-एन-138, सेक्टर-25, नोएडा

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