Friday, April 24, 2015

महेंद्र मिहोनवी की ग़ज़ल

इस हुकूमत में सबकी भलाई कहें
साफ ज़ाहिर ज़हर को दवाई कहें
जब अमावस की मानिन्द है जि़न्दगी
क्या गज़ल चाँदनी मे नहाई कहें
तब समझना कि ये भारी असगुन हुआ
जब गरीबों को वो अपना भाई कहें
अस्पतालों से साबुत निकल आये हैं
ये बड़े बेशरम हैं बधाई कहें
आप कहते हैं देवी जिसे मंच पर
घर के भीतर उसी को लुगाई कहें
इतना खामोश रहना भी अच्छा नहीं
कुछ तो अपनी कुछ पराई कहें
-सरकारी अस्पताल के पास मिहोना (भिण्ड) 09893946985

1 comment:

  1. वाह भाई बधाई ...संपर्क करिए ९८७१६९१३१३

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