Thursday, March 19, 2015

रघुविन्द्र यादव की लघुकथाएँ सामाजिक विसंगतियों को बेनकाब करती हैं : अशोक लव


-रघुविन्द्र यादव का लघुकथा संग्रह लोकार्पित
रघुविन्द्र यादव के दोहे जितने धारदार हैं, उनकी लघुकथाएँ भी उतनी ही पैनी धार वाली हैं। जिनमें आज के समाज का यथार्थ चित्रण है वहीं सामाजिक विद्रुपताओं और विसंगतियों को बेनकाब किया गया है।
उक्त विचार देश के सुप्रसिद्ध लघुकथाकार अशोक लव ने विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में नारनौल के चर्चित साहित्यकार रघुविन्द्र यादव के दूसरे लघुकथा संग्रह अपनी-अपनी पीड़ा का लोकार्पण करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि रघुविन्द्र यादव ने इन लघुकथाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न रूपों को चित्रित किया है। इसके लिए उन्होंने जीवंत और प्रभावशाली पात्रों का सृजन किया है। श्री यादव की एक साल में अलग-अलग विधा की चार पुस्तकों का प्रकाशन उन्हें बहुमुखी प्रतिभा सम्पन्न रचनाकार के रूप में स्थापित करता है।
रघुविन्द्र यादव के दो दोहा संग्रह-नागफनी के फूल और वक्त करेगा फैसला’, दो लघुकथा संग्रह-बोलता आईना और अपनी-अपनी पीड़ा’, एक कुंडलिया छंद संग्रह-मुझमें संत कबीर तथा एक प्रेरक निबंध संग्रह-कामयाबी की यात्रा के अलावा चार संपादित पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और वे शोध तथा साहित्य की राष्ट्रीय पत्रिका बाबूजी का भारतमित्र का 2009 से संपादन कर रहे हैं। पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में भी उनकी पहचान है, यादव राष्ट्रीय जल बिरादरी की अरावली भू-सांस्कृतिक ईकाइ के समन्वय और नागरिक चेतना मंच के अध्यक्ष हैं।
इस अवसर पर प्रख्यात लघुकथाकार रामेश्वर कांबोज हिमांशु, अशोक वर्मा, अशोक मिश्र, हरनाम शर्मा, कवि कृष्णगोपाल विद्यार्थी, राजेश प्रभाकर, रतनलाल, श्रीमती चन्द्रप्रभा सूद, राधेश्याम भारतीय, गुरचरण सिंह और प्रकाशक भूपाल सूद सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित थे।


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