संयुक्त-परिवारों के दौर में दादी-नानी कहानी की पर्याय हुआ करती। बालमन पर संस्कारों की अमिट छाप छोडऩे वाली यह कहानी परम्परा अब लुप्त होने के कगार पर है किंतु बाल-साहित्य के माध्यम से हमारे रचनाकार इसी कमी को पूरा करने का प्रयास करते रहे हैं। ऐसा ही प्रेरक प्रयास है आलोच्य कृति 'प्रेरणा के बोलÓ जिसमें रचनाकार शमशेर कोसलिया नरेश ने लोककथानाक एवं नवीन भाव भूमि पर आधारित उन पच्चीस कहानियों को शामिल किया है, जो बाल साहित्य की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं।
'सबकÓ से प्रारंभ होकर 'गलतफहमीÓ पर सम्पन्न हुआ पच्चीस बाल कहानियों का यह सफर बेहद रोचक एवं प्रेरक है। एक ओर जहां इन रचनाओं में कहानी के सभी मूलतत्व विद्यमान हैं वहीं इनमें लोककथाओं की भावभूमि, बालमनोविज्ञान पर आधारित रचनाधर्मिता इन्हें व्यवहारिक व प्रेरक बनाती है। ये कहानियां बच्चों को रोमांचित करने के साथ उनमें समझ, प्रेरणा, सीख, मेहनत, ईमानदारी जैसे सुसंस्कार भरने की मादा रखती हैं।
संग्रह की अधिकांश कहानियां अपने शीर्षक को चरितार्थ करती हुई संबंधित सीख भी देती हैं जिनमें वफादारी, सही राह, समझदारी, स्वावलंबी विजय, ईमानदारी, दो भाई हिम्मत वाले, समझ से बने वजीर एवं गलतफहमी शामिल हैं। इसके अलावा कहानी मनीष में बहादुरी, जीभ और दांत में सहनशीलता, जमीन में कलश में जीवरक्षा, डाकुओं का सफाया में बहादुरी की सीख मिलती है। धन लोलुप्ता तथा लोभ पर आधारित कहानियां ठगों का सफाया व दो लाल तथा लोक मंगल की कामना व भावना पर आधारित कहानी 'गोली तो थोथी हैÓ अच्छी बन पड़ी हैं। अहीरवाल की चर्चित लोककथा 'टपकले का डरÓ को भी संग्रह में स्थान दिया गया है तथा इसी क्षेत्र के चरखीदादरी, महेन्द्रगढ़, स्याणा, कोटिया, सेहलंग, नाहड़, सीहमा के ऐतिहासिक एवं सामाजिक स्वरूप के साथ सत्य कथाएं भी शामिल की गयी हैं।
आधा दर्जन कृतियों के रचनाकार श्री कोसलिया की यह पुस्तक कई मायनों में उनकी अन्य पुस्तकों से अलग है। सरल-सहज भाषाशैली, आकर्षक आवरण, सुंदर छपाई, जहां इस संग्रह की अन्य विशेषताएं हैं, वहीं संग्रह में वर्तनी की अशुद्धियां तथा रेखाचित्रों का धुंधलापन अखरता है। संग्रह की भूमिका में प्रख्यात बाल साहित्यकार घमंडीलाल अग्रवाल ने उचित ही कहा है कि ग्राम्य परिवेश में रची-बसी ये बाल-कहानियां बाल साहित्य को समृद्ध करेंगी। कुल मिलाकर बाल कहानी विधा में कृति 'प्रेरणा के बोलÓ यथानाम तथा गुण साबित होगी-ऐसी आशा है।
सत्यवीर नाहडिय़ा
पुस्तक : प्रेरणा के बोल
लेखक : शमशेर कोसलिया 'नरेशÓ
प्रकाशक : ऋषि उद्दालक प्रकाशन, स्याणा(महेन्द्रगढ़)
मूल्य : 150 रु. पृष्ठ : 104
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