Saturday, July 4, 2015

गीत - धीरज श्रीवास्तव

सेतु बनाकर अपने दिल से
उसके दिल को जोड़ लिया!
मैँने जैसे कोई तारा
आज गगन से तोड़ लिया!

आओ खुशियोँ साथ निभाओ
और सदा ही संग रहो!
आँगन मेरे महको बेला
लगकर मेरे अंग रहो!
सच कहता हूँ मैँने मुँह को
अवसादोँ से मोड़ लिया!
मैँने जैसे कोई....

सरसो के पीले फूलोँ सा
झूमे औ' मुस्काये मन!
पछुवाई भी भंग पिलाये
खूब हँसे बौराये मन!
रंग गुलाबी घोला मैँने
अपने ऊपर छोड़ लिया!
मैँने जैसे कोई....

आऊँ जाऊँ अन्दर बाहर
ठुमक ठुमक कर नाचूँ मैँ!
और सुखोँ की इक इक चिट्ठी
अन्तर्मन मेँ बाचूँ मैँ!
देख दुखो ने अपना सर औ
अपना माथा फोड़ लिया!
मैँने जैसे कोई....

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