आज भी जु़ल्मतों को नहीं है ख़बर
आखि़रश कैसे होती है रौशन सहर ?
वो तअस्सुब की रह पर न चलते अगर
वीरॉं होने से बच जाते कितने ही घर
ख़त्म हो ही गई जुस्तजू में उमर
एक भी शख़्स़ तो ना मिला मोतबर
चापलूसी नहीं मुझको भाती ज़़रा
इसलिये तो ख़फ़ा है अमीरे-शहर
मन्ज़िलों के निशाँ तक नहीं मिलते हैं
देखिये मुश्किलों से भरा है सफ़़र
ushayadavusha
आखि़रश कैसे होती है रौशन सहर ?
वो तअस्सुब की रह पर न चलते अगर
वीरॉं होने से बच जाते कितने ही घर
ख़त्म हो ही गई जुस्तजू में उमर
एक भी शख़्स़ तो ना मिला मोतबर
चापलूसी नहीं मुझको भाती ज़़रा
इसलिये तो ख़फ़ा है अमीरे-शहर
मन्ज़िलों के निशाँ तक नहीं मिलते हैं
देखिये मुश्किलों से भरा है सफ़़र
Page link-
http://www.facebook.com/
0 comments:
Post a Comment