Friday, June 19, 2015

गीत - डॉ. प्रदीप शुक्ल

मेघा आये रे 

बिजुरी चमकी
धरती महकी
दादुर गाये रे !
मेघा आये, मेघा आये
मेघा आये रे !!

जोरों से चलती पुरवाई
छप्पर ऊपर बेल लजाई
पतली कमर टूट ना जाए
लिपटी है वो सौ बल खाई
बस मुंडेर की कग्गर उससे
छूट न जाए रे
मेघा आये, मेघा आये
मेघा आये रे !!

आसमान का पूरा आँगन
बदरा दौड़ रहे घोड़ा बन
आतिशबाजी करे बिजुरिया
बूँदें नाचे छनन छनन छन
जोर जोर से झींगुर
राग कहरवा गाये रे
मेघा आये, मेघा आये
मेघा आये रे !!

टपक रही छत कोने कोने
गीले सारे हुए बिछौने
घुस आया पानी दालान तक
खटिया मचिया लगा भिगोने
सिर पर बोरी डाले कक्का
छत पर धाये रे
मेघा आये, मेघा आये
मेघा आये रे !!

- डॉ. प्रदीप शुक्ल

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