Monday, May 4, 2015

डॉ.श्याम सखा 'श्याम' की ग़ज़ल

जब कि हर दिल में प्यार रहता है
दिल क्यों फिर बेकरार रहता है
गुल गुलामी करे है मौसम की
मस्त हर वक़्त खार रहता है
इश्क माना बुरी है शय लेकिन
दिल पे कब इख़्ितयार रहता है
भूल जाते हैं दोस्त को हम लोग
दिल पे दुश्मन सवार रहता है
वक्त तो लौटकर नहीं आता
शेष बस इन्तजार रहता है
'श्याम' अहसान चीज है जालिम
जि़न्दगी भर उधार रहता है।
- डॉ.श्याम सखा 'श्याम'

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