मानवता को मारना, राजनीति का काम।
इन्सां की कीमत नहीं, चित्रों के हैं दाम।।
चित्रों के हैं दाम, संतजन काम न करते।
ढोंग और पाखंड, देश में चोखे चलते।
चलते चोखे काम, नमन है दानवता को।
मानवता को मारना, नहीं हमारा काम।
केवल ऐसा बोलकर, करते घर आराम।।
करते घर आराम, निकलते नहीं घरों से।
होती नहीं उड़ान, कभी भी गैर परों से।
करके अच्छे काम, हराओ दानवता को।
अगर बचाना देश, बचाओ मानवता को।।
अफसर करते अफसरी, वर्कर करें न वर्क।
रिश्वतखोरी के लिए, गढ़ते रहते तर्क।।
गढ़ते रहते तर्क, हुई है चमड़ी मोटी।
मन में बसता चोर, और है नीयत खोटी।
जनता इनसे त्रस्त, पड़े हैं जैसे अजगर।
वर्कर नेता मस्त, काम ना करते अफसर।।
झाँसे में आना नहीं, सुनलो खासो आम।
अब्दुल को समझा रहे काका लालाराम।
काका लालाराम, कहें सबको समझाई।
नेता से रह दूर, इसी में है चतुराई।
करो समझ से आप, सुरक्षित ताना बाना।
नेता धोखेबाज़, नहीं झाँसे में आना।
-राहुल गुप्ता, लोहवन, मथुरा
बहुत सुंदर रचना
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