Wednesday, April 8, 2015

दोहे


खुद को अच्छा कीजिए, धर ईश्वर का ध्यान !
अच्छे हैं यदि आप तो, अच्छा सकल जहान !!

उँगली नहीं उठाइये, किसी और पर आप !
पहले खुद को नापिये, भलमंसी की नाप !!

पहले खुद को तौलिये, तब दूजे पर ध्यान !
देंगे यदि सम्मान तो, पायेंगे सम्मान !!


देख स्वयं को ‘हसन’ तब, दूजे अंगुल तान !
इक जावे दूजी तरफ, तीन स्वयं को आन !!

गरमी में छाया लगे, लगे ठण्ड में धूप !
माँ के जैसा कौन है, माँ ईश्वर का रूप !!

प्रसव-पीर भूली सभी, किया पुत्र को प्यार !
माता को जैसे मिला, इस जहान का सार !!

निरख पुत्र का मुख सुघर, किया हृदय से प्यार !
नारी को जैसे मिला, इक अद्भुत संसार !!    

कौओं के दरबार में, कोयल बैठी मौन !
अपराधी जब जज बने, न्याय करें अब कौन !!


अमर शहीदों का रहा, दर्द भरा इतिहास !
चले गये अंग्रेज सब, हम अब भी हैं दास !!

अँधियारी हैं बस्तियाँ, जलें प्रेम के दीप !
सुख-मोती चमके, खुले, भेद-भाव के सीप !!

पुतले चहुँदिश फूँककर, खुष हो रहा समाज !
गली, गाँव हर शहर में, जिंदा रावण आज !!


-अलीहसन मकरैंडिया
एनटीपीसी टाउनशिप, डा०-विद्युत नगर,
जिला-गौतम बुद्ध नगर (उ० प्र०), पिन-201 008


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