पथिक, क्यूँ है व्यथित, गर राह है तेरी मुश्किल
न तज, तू हौसला निज, पायेगा निश्चय मंजिल
पथ में मिले फूल या कांटे
सुख-दुःख तो ईश्वर ने बांटे
किसने अलग-अलग है छांटें
चल, सबसे मिल साथ, सफर ना होगा बोझिल
पायेगा निश्चय मंजिल, पायेगा निश्चय मंजिल
पग में लाख पड़े हो छाले
हिम्मत को हथियार बनाले
मन आशा का दीप जलाले
रुके, पड़े जो थके, बांह दे, कर संग शामिल
पायेगा निश्चय मंजिल, पायेगा निश्चय मंजिल
जग में कुछ ना लेकर आया
भला बुरा सब यहीं है पाया
फिर काहे की है मोह माया
चले, नही कुछ भले, भलाई संग में ले चल
पायेगा निश्चय मंजिल, पायेगा निश्चय मंजिल
ताराचन्द शर्मा "नादान"
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