Sunday, April 5, 2015

सौदा

"क्या बात है भाई साहब, आजकल दिखाई नहीं देते?"
"भाई, मैं इन दिनों बहुत व्यस्त हूँ| मेरे साहित्य पर शोध हो रहा है|
"हाँ वह तो आपने अख़बार में छपवाया तब पढ़ लिया था, मगर आप व्यस्त क्यों है ? काम तो शोध करने वाले को करना है|"
"वह इसी शर्त पर मेरे साहित्य पर शोध करने को राजी हुआ है कि सारा काम मैं पूरा करके दूंगा|"
"अच्छा-अच्छा शोध नहीं सौदा है |’’
-रघुविन्द्र यादव 


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