Friday, April 3, 2015

दया मुझे मत दीजिए

सीख रहा संसार में, जीने का मैं ढंग।
परिचय मेरा बस यही, कहते लोग अपंग॥

जी भरके कर लीजिए, मुझ पर अत्याचार।
पछताओगे एक दिन, सुनो बड़े सरकार॥

दया मुझे मत दीजिए, रखिए अपने पास।
मेरे केवल दर्द का, नहीं करें उपहास॥

मीठा-मीठा बोलकर, समा बाँधते खूब।
अंदर से छिछले मिले, 'पूतू' देखा डूब॥

अनुभव मेरा कह रहा, सत्य लीजिए जान।
घृणा करें विकलांग से, ठीक ठाक इंसान॥

काम पड़े पहचानते, काम बने अनजान।
ऐसे इस संसार में, मिलें बहुत इंसान॥

जिस घर में माता-पिता, पाते कभी न मान।
ईंटोँ का वह ढेर बस, बसे वहाँ शैतान॥


वादे करके बन चुके, अब तक कई प्रधान।
ज्यों का त्यों पर गाँव है, करे न कोई ध्यान॥

-पीयूष कुमार द्विवेदी 'पूतू'

0 comments:

Post a Comment