Tuesday, June 16, 2015

नज़्म- राजेन्द्रनाथ 'रहबर'

शाख से गुल को तोड़कर लाना कोई अच्छी बात नहीं है
फूलों से गुलदान सजाना कोई अच्छी बात नहीं है

दिन में पीना और पिलाना कोई अच्छी बात नहीं है
सूरज रहते जाम उठाना कोई अच्छी बात नहीं है

मुर्गे को टेबल पर सजाना कोई अच्छी बात नहीं है
पेट को कब्रिस्तान बनाना कोई अच्छी बात नहीं है

ना-कद्रों को शे'र सुनाना कोई अच्छी बात नहीं है
भैंस के आगे बीन बजाना कोई अच्छी बात नहीं है ||
                                -राजेन्द्रनाथ 'रहबर'

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