Tuesday, May 12, 2015

ग़जल-डॉ.मीना नक़वी

सफ़र को पाॆँव के चक्कर तलाश करने हैं 

हमें खु़द अपने मकद्दर तलाश करने हैं

लबों पे प्यास सजा कर ख्य़ाल ये रखना 

कि बूँद में भी समन्दर तलाश करने हैं

जो मंजिलों की ज़मानत दें राहबर भी बनें 

हमें वो मील के पत्थर तलाश करनें हैं

सजा के ज़ेहन मे माज़ी की धुंधली तस्वीरें 

जो खो गये हैं वो मन्ज़र तलाश करने हैं


जिन्हें ग़ज़ल से मोहब्बत अदब सेे उल्फत हो 

ए "मीना" ऎसे सुखनवर तलाश करने है|

-डॉ. मीना नक़वी, अगवानपुर, मुरादाबाद 

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