चर्चा अपने क़त्ल का अब दुश्मनों के दिल में है
देखना है ये तमाशा कौन-सी मंजिल में है
कौम पर कुर्बान होना सीख लो ऐ हिन्दियो
ज़िन्दगी का राजे-मुज्मिर खंज़रे कातिल में है
साहिले मक़सूद पर ले चल खुदारा नाखुदा
आज हिन्दुस्तान की कश्ती बड़ी मुश्किल में है
दूर हो अब हिन्द से तारीकि-ए-बुग्जो-हसद
अब यही हसरत यही अरमाँ हमारे दिल में है
बामे रफअत पर चढ़ा दो देश पर होकर फना
बिस्मिल अब इतनी हविश बाकी हमारे दिल में है||
न चाहूँ मान दुनिया में न चाहूँ स्वर्ग को जाना
मुझे वर दे यही माता रहूँ भारत पे दीवाना
करूँ मैं कौम की सेवा पड़ें चाहे करोड़ों दुख
अगर फिर जन्म लू आकर तो भारत में ही हो आना
लगा रहे प्रेम हिंदी से पढूं हिंदी लिखूं हिंदी
चलन हिंदी चलूँ हिंदी पहरना ओढ़ना खाना
भवन में रौशनी मेरे रहे हिंदी चिरागों की
स्वदेशी ही रहे बाजा, बजाना, राग का गाना
लगें इस देश के ही अर्थ मेरे धर्म, विद्या, धन
करूँ प्राण तक अर्पण यही प्रण सत्य है ठाना
नहीं कुछ गैर-मुमकिन है जो चाहो चाहो दिल से बिस्मिल
तुम उठा लो देश हाथों पर न समझो अपना बेगाना
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है
करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ सहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है
खींचकर लायी है सब को क़त्ल होने की उम्मीद
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-कातिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर
खून से खेलेंगें होली गर वतन मुश्किल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हाथ जिन में हो जुनूं कटते नहीं तलवार से
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पर कफ़न
जान हथेली पर लिए लो बढ़ चले हैं ये कदम
जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
यूँ खड़ा मकतब में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है
दिल में तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंजिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जूनून
तूफानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ये तमाशा कौन-सी मंजिल में है
कौम पर कुर्बान होना सीख लो ऐ हिन्दियो
ज़िन्दगी का राजे-मुज्मिर खंज़रे कातिल में है
साहिले मक़सूद पर ले चल खुदारा नाखुदा
आज हिन्दुस्तान की कश्ती बड़ी मुश्किल में है
दूर हो अब हिन्द से तारीकि-ए-बुग्जो-हसद
अब यही हसरत यही अरमाँ हमारे दिल में है
बामे रफअत पर चढ़ा दो देश पर होकर फना
बिस्मिल अब इतनी हविश बाकी हमारे दिल में है||
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न चाहूँ मान दुनिया में न चाहूँ स्वर्ग को जाना
मुझे वर दे यही माता रहूँ भारत पे दीवाना
करूँ मैं कौम की सेवा पड़ें चाहे करोड़ों दुख
अगर फिर जन्म लू आकर तो भारत में ही हो आना
लगा रहे प्रेम हिंदी से पढूं हिंदी लिखूं हिंदी
चलन हिंदी चलूँ हिंदी पहरना ओढ़ना खाना
भवन में रौशनी मेरे रहे हिंदी चिरागों की
स्वदेशी ही रहे बाजा, बजाना, राग का गाना
लगें इस देश के ही अर्थ मेरे धर्म, विद्या, धन
करूँ प्राण तक अर्पण यही प्रण सत्य है ठाना
नहीं कुछ गैर-मुमकिन है जो चाहो चाहो दिल से बिस्मिल
तुम उठा लो देश हाथों पर न समझो अपना बेगाना
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सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है
करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ऐ सहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वक़्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमाँ
हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है
खींचकर लायी है सब को क़त्ल होने की उम्मीद
आशिकों का आज जमघट कूचा-ए-कातिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
है लिए हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर
और हम तैयार हैं सीना लिए अपना इधर
खून से खेलेंगें होली गर वतन मुश्किल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हाथ जिन में हो जुनूं कटते नहीं तलवार से
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पर कफ़न
जान हथेली पर लिए लो बढ़ चले हैं ये कदम
जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
यूँ खड़ा मकतब में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है
दिल में तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाए जो हमसे दम कहाँ मंजिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जूनून
तूफानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
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